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आतंकवाद का मिलकर मुकाबला करें बिम्सटेक देश

31 Mar, 2022

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में विम्सटेक (वे आफ बंगाल इनिशिएटिव फार मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनोमिक कोआपरेशन) के विदेश मंत्रियों की बैठक संपन्न हुई।

मुख्य बिंदु :-

  • बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सातों सदस्य देशों (भारत, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, भूटान, थाइलैंड व नेपाल) से आतंकवाद और हिंसक कट्टरता के खिलाफ सामूहिक नीति बनाने का आह्वान किया।
  • आगे यहीं इस संगठन की शिखर बैठक भी होनी है। शिखर बैठक के बाद संगठन की तरफ से संयुक्त घोषणा पत्र (चार्टर) जारी किया जाएगा, जिसमें आतंकवाद को लेकर सामूहिक नीति का उल्लेख होगा।

आतंकवाद के खिलाफ ज्यादा सहयोग स्थापित

  • भारत इसको लेकर खास तौर पर दबाव बना रहा है और इसका एक अहम उद्देश्य दक्षिण एशिया के अधिकांश देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ ज्यादा सहयोग स्थापित करना होगा।
  • सार्क संगठन में ऐसा करना पाकिस्तान की वजह से संभव नहीं हो पा रहा था। आतंकवाद में पाकिस्तान की भूमिका की वजह से ही वर्ष 2016 में सार्क देशों की प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी थी। तभी से इसकी बैठक स्थगित है।
  • पाकिस्तान के रवैये की वजह से दक्षिण एशियाई देशों का संगठन सार्क पूरी तरह से निष्क्रिय है लेकिन इसका एक फायदा यह होता दिख रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ इस क्षेत्र के अधिकांश देशों के बीच एक सोच बन रही है।
  • भारतीय विदेश मंत्री ने के अनुसार आतंकवाद और हिंसक कट्टरता की चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसी तरह से मादक पदार्थों के कारोबार और साइबर हमले भी बड़ी चुनौतियां हैं।
  • अतः इस क्षेत्र के बीच एक कानूनी ढांचा होना चाहिए ताकि हमारी कानूनी जांच एजेंसियों के बीच इस तरह की चनौतियों के खिलाफ ज्यादा करीबी व प्रभावशाली संपर्क स्थापित हो सके।

वैश्विक व्यवस्था बहुत ही चुनौतीपूर्ण

  • यूकेन-रूस युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्था बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रही है। अभी कोरोना महामारी से जुड़ी चुनौतियां समाप्त भी नहीं हुई थी कि यूक्रेन की घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय बेचैनी और बढ़ गई है।
  • इससे हमें यह सीख मिलती है कि अंतरराष्ट्रीय अमन, सुरक्षा और स्थायित्व को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हम जो विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं उसकी पहचान करनी चाहिए।

बिम्सटेक देशों के बीच नौवहन पर जोर

  • उन्होंनेने बिम्सटेक देशों के बीच बंदरगाहों के इस्तेमाल, नौका यातायात को बढ़ावा देने, ग्रिड कनेक्टिविटी और मोटर वाहनों के आवागमन को सहयोग के भावी क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किया।

पहली बार बिम्सटेक चार्टर का होगा एलान

  • विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि पहली बार बिम्सटेक चार्टर का एलान किया जाएगा जो यह इस संगठन को एक अंतरराष्ट्रीय पहचान देगा। व्यापक उद्देश्य व लक्ष्यों को भी निर्धारित किया जाएगा। यह भी तय है कि भारत संगठन को आगे बढ़ाने वाला प्रमुख देश होगा।

Source – The Hindu

 

Nirman IAS (Surjeet Singh)

Current Affairs Author