FAQs Detail

प्रश्न:

क्या हिंदी माध्यम वालों के लिए अब यूपीएससी के दरवाजे बंद हो रहे हैं?

उत्तर:

उत्तर थोड़ा लंबा होगा। इसलिए आप शुभी पाठकों से अनुरोध है कि यदि आप वाकई में प्रश्न उत्तर एक विस्तृत विश्लेषण के माध्यम से चाहते हैं तो ही आगे जारी रखें। यदि आपको उत्तर पसंद न आए तो अपने सुझाव अवश्य रखें, मैं अपने ज्ञान में वृद्धि के लिए इसे स्वीकार करना चाहूंगा।

ये बात वर्ष 2015 वाले प्रयास की है। आईआईटी दिल्ली से मैथ में मास्टर करने के बाद मैंने यूपीएससी की ओर कदम बढ़ाया। मेरी स्नातक तक की पढ़ाई मैंने हिंदी माध्यम से ही की थी। इसलिए यूपीएससी लिए मैंने हिंदी माध्यम ही चुना। इसके लिए मैंने किसी से कोई सलाह नहीं ली क्योंकि पढ़ना मुझे था। अपनी बारीकियों को मुझसे बेहतर कोई नहीं जान सकता था। वैकल्पिक विषय गणित ही रखा और उस समय सामान्य अध्ययन और वैकल्पिक दोनों माध्यम एक ही रखना होता था। हालांकि गणित हिंदी में करना हमारे लिए मंगल ग्रह पर जीवन यापन के समान था लेकिन मजबूरी में यह रखना पड़ा।

सबसे पहली गलती - इसका माध्यम से कोई लेना देना नहीं है।

टेस्ट सीरीज इग्नोर करना- क्योंकि कई लोगों ने ऐसा वहम डाल दिया था कि कोचिंग संस्थान जानबूझकरऐसे प्रश्न बनाते हैं जो यूपीएससी का लेवल नहीं है।

इसके बाद पिछले साल के यूपीएससी प्रश्नों का सही विश्लेषण हम नहीं करते थे। । मन में ये रखकर कि पहले करेंट हमें पता नहीं था। इसलिए ये प्रश्न गलत होने पर हमारा कॉन्फिडेंस लूज कर जाएगा। ऐसी ही कई गलत धारणाएं , हमारे मनों में घर कर गई थीं।

जब भी कोई चयनित हमें क्लास में टिप्स देने आता था, हम अक्सर उठकर चले जाते थे। हमारा आईआईटी से होने का घमंड हमें ऐसा करने को कहता था। सोच यह थी कि हम अपनी स्ट्रेटजी पर काम करेंगे। हम यही गलती कर गए। हमें लोगों के अनुभव से सीखना चाहिए।

नतीजा- हमने ये अटेम्प्ट 0.33 अंक से मिस कर दिया। कोई लाग लपेट नहीं रखूंगा। हां सामान्य कैटगरी में ये हुआ था। इसलिए ये तो था कि हम काफी करीब थे। लेकिन जो गलतियां हुई थीं, हमने उन्हें बहुत गहराई से सोचा। बात ये नहीं थी कि 0.33 अंक और होते तो मेरा सलेक्शन हो जाता। नहीं ऐसा नहीं है क्योंकि हो सकता है आगे जीवन में मेरी ये घमंडी पर्सनलिटी हमें और पीछे धकेल देती। इसलिए खुद को जांचना बहुत जरूरी था।

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परिवार को दो जून की रोटी या अपने सपनों के पीछे????

परिवार बड़े भाई के कुछ गलत निर्णयों के कारण सड़क पर था। हमने पहला विकल्प चुना और यूपीएससी छोड़ दिया। इतना नजदीक होकर छोड़ने दर्द अगले पूरे साल मुझे चुभता रहा। टीचिंग ज्वाइन कर लिया था। हायर मैथमेटिक्स में शोध के लिए विद्यार्थियों को तैयार करना एक चुनौतपूर्ण कार्य था। मेरे मन की उथल पुथल से मेरा फीडबैक निगेटिव आता था।

इसके बाद मैंने चीजों को अलग नजरिए से देखना शुरू किया। आज मैं जहां हूं, वहां मुझे सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना है। सिविल सेवा को भूलकर। मैंने ऐसा ही किया। घर की जरूरतें पूरी हुई। परन्तु मैंने अब खुद को टीचिंग में खपा दिया था। बच्चों के साथ उनकी समस्याओं को बच्चे की तरह समझना, एग्जाम की डिमांड को गहराई से पड़ताल करना और एगजम हॉल की विशेष तैयारी करना। ये जॉब वाला परिचय उत्तर विश्लेषण के लिए जरूरी था, इसलिए दिया। आप चाहें तो इग्नोर कर सकते हैं।